
भारत सरकार की महत्वाकांक्षी PM Poshan Yojana 2026 देश के बच्चों के भविष्य को संवारने और उन्हें कुपोषण से मुक्ति दिलाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। यह योजना, जिसे पहले मिड-डे मील स्कीम के नाम से जाना जाता था, अब ‘प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण’ (PM POSHAN) के रूप में एक नए और व्यापक दृष्टिकोण के साथ करोड़ों बच्चों को स्कूल में पौष्टिक भोजन प्रदान कर रही है। यह सिर्फ भोजन उपलब्ध कराने की योजना नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक समानता को बढ़ावा देने का एक सशक्त माध्यम है।
योजना का नाम
PM Poshan Yojana 2026
मंत्रालय
शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
उद्देश्य
बच्चों को पौष्टिक भोजन देना और शिक्षा बढ़ाना
लाभार्थी
Bal Vatika से कक्षा 8 तक के छात्र
लाभ
मुफ्त गर्म भोजन (Hot Cooked Meal)
कवरेज
पूरे भारत में लागू
PM Poshan Yojana 2026 का प्राथमिक लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी बच्चा भूख के कारण स्कूल न छोड़े और प्रत्येक बच्चे को शारीरिक और मानसिक विकास के लिए आवश्यक पोषण मिले। यह दुनिया की सबसे बड़ी स्कूल भोजन योजनाओं में से एक है, जो भारत के कोने-कोने में स्थित सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में बच्चों के लिए एक गर्म, पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करती है।
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1. PM Poshan Yojana क्या है? एक विस्तृत अवलोकन
PM Poshan Yojana 2026 भारत सरकार द्वारा प्रायोजित एक केंद्रीय योजना है, जिसका संचालन शिक्षा मंत्रालय द्वारा किया जाता है। इस योजना के तहत, स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मुफ्त में पका हुआ, गर्म और पौष्टिक भोजन प्रदान किया जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य बच्चों में पोषण के स्तर में सुधार करना, स्कूल में उनकी उपस्थिति बढ़ाना और सीखने के परिणामों को बेहतर बनाना है।
यह योजना विशेष रूप से बाल वाटिका (प्री-प्राइमरी) से लेकर कक्षा 8 तक के बच्चों को कवर करती है। इसका विस्तार पूरे भारत में है, जिससे ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों के बच्चे लाभान्वित होते हैं। यह योजना उन गरीब और वंचित परिवारों के लिए एक बड़ी राहत है, जिनके लिए बच्चों को भरपेट भोजन कराना एक चुनौती हो सकती है। PM Poshan Yojana 2026 बच्चों को स्कूल में एक नियमित भोजन प्रदान करके उनकी पोषण संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करती है, जिससे वे अपनी पढ़ाई पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
2. योजना का ऐतिहासिक सफर: मिड-डे मील से PM POSHAN तक
PM Poshan Yojana 2026 का वर्तमान स्वरूप दशकों के विकास और अनुभवों का परिणाम है। इसकी जड़ें 1995 में शुरू की गई “मिड-डे मील स्कीम” (MDMS) में निहित हैं।
- 1995: भारत सरकार ने प्राथमिक शिक्षा के सार्वभौमिकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने और बच्चों में पोषण स्तर में सुधार के लिए MDMS की शुरुआत की। शुरुआती दौर में, यह योजना केवल 2408 ब्लॉकों में लागू की गई थी।
- 2001: सर्वोच्च न्यायालय ने एक ऐतिहासिक निर्णय में इस योजना को सभी सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त प्राथमिक विद्यालयों में अनिवार्य कर दिया। इस निर्णय ने योजना के दायरे और महत्व को अभूतपूर्व रूप से बढ़ा दिया।
- 2007: योजना का विस्तार प्राथमिक स्तर से बढ़ाकर उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8) तक किया गया।
- 2021: एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, मिड-डे मील स्कीम का नाम बदलकर “प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण” (PM POSHAN) योजना कर दिया गया। यह नाम परिवर्तन केवल एक प्रतीकात्मक कदम नहीं था, बल्कि योजना के उद्देश्यों और दायरे को अधिक व्यापक बनाने का संकेत था। नए नाम के साथ, योजना ने पोषण सुरक्षा, स्वास्थ्य और शिक्षा के बीच संबंधों पर अधिक जोर दिया।
आज, यह योजना 10 करोड़ से अधिक बच्चों तक पहुंचती है, जो इसे दुनिया की सबसे बड़ी ऐसी योजनाओं में से एक बनाती है। PM Poshan Yojana 2026 इस विरासत को आगे बढ़ा रही है, जिसमें पोषण और शिक्षा के बीच के गहरे संबंध को मजबूत किया जा रहा है।
3. PM Poshan Yojana के प्रमुख उद्देश्य: “भूख खत्म + पढ़ाई बढ़ाओ”
PM Poshan Yojana 2026 के उद्देश्य बहुआयामी हैं और इनका लक्ष्य बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करना है:
- बच्चों को पौष्टिक भोजन प्रदान करना: यह योजना बच्चों को आवश्यक कैलोरी, प्रोटीन और सूक्ष्म पोषक तत्व प्रदान करके उनके शारीरिक और मानसिक विकास को सुनिश्चित करती है। यह कुपोषण से निपटने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
- स्कूल में उपस्थिति और नामांकन बढ़ाना: मुफ्त भोजन एक शक्तिशाली प्रोत्साहन के रूप में कार्य करता है, जो बच्चों को स्कूल आने के लिए प्रेरित करता है, खासकर उन परिवारों से जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं। यह ड्रॉपआउट दर को कम करने में भी मदद करता है।
- कुपोषण (Malnutrition) कम करना: बच्चों में अल्पपोषण और एनीमिया जैसी समस्याओं को दूर करने के लिए योजना नियमित और संतुलित भोजन प्रदान करती है, जिससे उनके स्वास्थ्य सूचकांकों में सुधार होता है।
- शिक्षा को बढ़ावा देना और सीखने के परिणामों में सुधार: जब बच्चे भूखे नहीं होते, तो वे पढ़ाई पर बेहतर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं। पोषण संबंधी सुरक्षा उनकी संज्ञानात्मक क्षमताओं को बढ़ाती है, जिससे उनके शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार होता है।
- सामाजिक समानता और समावेशिता को बढ़ावा देना: स्कूल में सभी बच्चों को एक साथ भोजन करने से जाति, धर्म या आर्थिक स्थिति के भेदभाव को कम करने में मदद मिलती है, जिससे सामाजिक सद्भाव और समानता की भावना विकसित होती है।
- गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ कम करना: यह योजना गरीब परिवारों के लिए भोजन के खर्च को कम करती है, जिससे वे अपने बच्चों को स्कूल भेजने के लिए अधिक इच्छुक होते हैं।
संक्षेप में, PM Poshan Yojana 2026 “भूख खत्म + पढ़ाई बढ़ाओ” के सरल लेकिन शक्तिशाली दर्शन पर आधारित है, जिसका उद्देश्य भारत के भविष्य को स्वस्थ और शिक्षित बनाना है।
4. महत्वपूर्ण जानकारी: एक नज़र में PM Poshan Yojana 2026
PM Poshan Yojana 2026 के तहत कुछ महत्वपूर्ण बिंदु इस प्रकार हैं:
- योजना का नाम: PM Poshan Yojana (प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण)
- मंत्रालय: शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार
- योजना का प्रकार: केंद्र प्रायोजित योजना
- मुख्य लाभ: सरकारी और सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को मुफ्त गर्म पका हुआ भोजन
- कक्षाएं शामिल: बाल वाटिका (प्री-प्राइमरी) से कक्षा 8 तक के बच्चे
- भौगोलिक कवरेज: पूरे भारत में लागू
- वर्तमान कार्यान्वयन अवधि: PM Poshan Yojana 2021-2026 तक के लिए अनुमोदित है।
यह योजना एक व्यापक ढांचा प्रदान करती है जो देश के शैक्षिक और पोषण परिदृश्य को बदलने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
5. PM Poshan Yojana 2026 के लिए पात्रता मानदंड
PM Poshan Yojana 2026 का लाभ प्राप्त करने के लिए पात्रता मानदंड बहुत सरल और समावेशी हैं:
- स्कूल नामांकन: बच्चे को किसी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल, मदरसा या मकतब में नामांकित होना चाहिए, जिन्हें शिक्षा मंत्रालय द्वारा सहायता प्रदान की जाती है।
- कक्षा स्तर: बच्चा बाल वाटिका (प्री-प्राइमरी) से लेकर कक्षा 8 तक की किसी भी कक्षा में पढ़ रहा हो।
- कोई आय सीमा नहीं: इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए परिवार की आय पर कोई प्रतिबंध नहीं है। यह सुनिश्चित करता है कि सभी पात्र बच्चों को, उनकी आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना, पौष्टिक भोजन मिले।
यह समावेशी दृष्टिकोण सुनिश्चित करता है कि योजना का लाभ वास्तव में उन सभी बच्चों तक पहुंचे जिन्हें इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है, बिना किसी भेदभाव के।
6. लाभार्थी: PM Poshan Yojana का व्यापक प्रभाव
PM Poshan Yojana 2026 भारत की सबसे बड़ी कल्याणकारी योजनाओं में से एक है, जिसका प्रभाव अविश्वसनीय रूप से विशाल है:
- 11 करोड़+ बच्चे: वर्तमान में, यह योजना पूरे देश में 11 करोड़ से अधिक बच्चों को सीधा लाभ पहुंचा रही है। यह संख्या इसे वैश्विक स्तर पर सबसे बड़ी स्कूल भोजन योजनाओं में से एक बनाती है।
- 11 लाख+ स्कूल: योजना के तहत 11 लाख से अधिक स्कूल, आंगनवाड़ी केंद्र और विशेष प्रशिक्षण केंद्र शामिल हैं, जो बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराते हैं।
ये आंकड़े योजना के पैमाने और बच्चों के जीवन पर इसके गहरे प्रभाव को दर्शाते हैं। यह योजना न केवल बच्चों को पोषण देती है, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी एक बड़ी राहत है, जिससे वे अपने बच्चों की शिक्षा पर अधिक ध्यान केंद्रित कर पाते हैं।
7. आवेदन प्रक्रिया: “Admission = Direct benefit”
PM Poshan Yojana 2026 में व्यक्तिगत आवेदन की कोई आवश्यकता नहीं होती है। यह प्रक्रिया बेहद सरल और स्वचालित है:
- सरकारी स्कूल में प्रवेश: यदि बच्चा किसी सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूल में नामांकित है, तो वह स्वचालित रूप से इस योजना का लाभार्थी बन जाता है।
- नियमित उपस्थिति: स्कूल में बच्चे की नियमित उपस्थिति यह सुनिश्चित करती है कि उसे योजना के तहत दैनिक भोजन प्राप्त हो।
- स्कूल द्वारा स्वचालित समावेशन: स्कूल प्रशासन द्वारा बच्चों को योजना में स्वतः शामिल कर लिया जाता है। अभिभावकों को किसी विशेष फॉर्म को भरने या आवेदन करने की आवश्यकता नहीं होती है।
यह “Admission = Direct benefit” दृष्टिकोण योजना को सभी पात्र बच्चों के लिए सुलभ बनाता है और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सरल रखता है।
8. भोजन मानक और पोषण विवरण
PM Poshan Yojana 2026 के तहत परोसे जाने वाले भोजन की गुणवत्ता और पोषण मानकों को सख्त दिशानिर्देशों द्वारा नियंत्रित किया जाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि बच्चों को पर्याप्त पोषण मिले।
- प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5):
- कैलोरी: प्रतिदिन कम से कम 450 कैलोरी
- प्रोटीन: प्रतिदिन 12 ग्राम प्रोटीन
- उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8):
- कैलोरी: प्रतिदिन कम से कम 700 कैलोरी
- प्रोटीन: प्रतिदिन 20 ग्राम प्रोटीन
भोजन में शामिल घटक:
इन मानकों को पूरा करने के लिए भोजन में आमतौर पर निम्नलिखित घटक शामिल होते हैं:
- चावल या गेहूं (ऊर्जा के लिए)
- दाल (प्रोटीन के लिए)
- मौसमी सब्जियां (विटामिन और खनिज के लिए)
- तेल और मसाले
- कुछ क्षेत्रों में, स्थानीय खाद्य पदार्थों और बाजरा को भी शामिल किया जाता है ताकि पोषण मूल्य को बढ़ाया जा सके और स्थानीय कृषि को बढ़ावा मिल सके।
भोजन की तैयारी, स्वच्छता और गुणवत्ता की नियमित निगरानी की जाती है ताकि बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिल सके।
9. फंडिंग और कुकिंग कॉस्ट: केंद्र और राज्य का साझा प्रयास
PM Poshan Yojana 2026 में “वेतन” सीधे लाभार्थियों को नहीं मिलता, बल्कि भोजन तैयार करने की लागत स्कूलों को दी जाती है। यह एक केंद्र प्रायोजित योजना है, जिसका अर्थ है कि लागत केंद्र सरकार और राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा साझा की जाती है।
- कुकिंग कॉस्ट (प्रति बच्चा प्रति दिन):
- प्राथमिक स्तर (कक्षा 1-5): ₹6.78
- उच्च प्राथमिक स्तर (कक्षा 6-8): ₹10.17
- यह लागत चावल/गेहूं, दालों, सब्जियों, तेल, मसालों और ईंधन की खरीद को कवर करती है।
- केंद्र और राज्य का योगदान:
- सामान्य राज्यों के लिए: केंद्र 60%, राज्य 40%
- पूर्वोत्तर राज्यों, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए: केंद्र 90%, राज्य 10%
- केंद्र शासित प्रदेशों के लिए: केंद्र 100%
केंद्र सरकार खाद्यान्न (चावल/गेहूं) भी मुफ्त में प्रदान करती है। यह साझा वित्तपोषण मॉडल योजना की स्थिरता और व्यापक पहुंच सुनिश्चित करता है।
10. PM Poshan Yojana 2026 के व्यापक लाभ
PM Poshan Yojana 2026 के लाभ केवल भोजन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये बच्चों और समाज के समग्र विकास में योगदान करते हैं:
- 1. मुफ्त पौष्टिक भोजन: बच्चों को प्रतिदिन एक संतुलित और गर्म भोजन मिलता है, जिससे उनकी भूख मिटती है और उन्हें दिनभर ऊर्जावान रहने में मदद मिलती है। यह उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है।
- 2. शिक्षा को बढ़ावा: भोजन के प्रोत्साहन से बच्चों की स्कूल में उपस्थिति और नामांकन दर बढ़ती है। यह ड्रॉपआउट दर को कम करने में भी सहायक है और बच्चों को नियमित रूप से स्कूल आने के लिए प्रेरित करता है।
- 3. कुपोषण में कमी: यह योजना बच्चों में अल्पपोषण, एनीमिया और अन्य पोषण संबंधी कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, जिससे उनके स्वास्थ्य और विकास में सुधार होता है।
- 4. गरीब परिवारों को राहत: आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के लिए बच्चों के भोजन का खर्च एक बड़ी चिंता होती है। यह योजना इस बोझ को कम करती है, जिससे वे अपने बच्चों की शिक्षा पर अधिक ध्यान दे पाते हैं।
- 5. सामाजिक समानता: सभी बच्चों को एक साथ भोजन करने से सामाजिक भेदभाव कम होता है। यह विभिन्न पृष्ठभूमि के बच्चों के बीच भाईचारे और समानता की भावना को बढ़ावा देता है।
- 6. महिला सशक्तिकरण: कई स्थानों पर, भोजन पकाने और परोसने का काम स्वयं सहायता समूहों (SHGs) की महिलाओं द्वारा किया जाता है, जिससे उन्हें रोजगार और आय का अवसर मिलता है।
- 7. कृषि और स्थानीय अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहन: स्थानीय स्तर पर खाद्यान्न, सब्जियां और अन्य सामग्री खरीदने से स्थानीय किसानों और आपूर्तिकर्ताओं को लाभ होता है, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा मिलता है।
11. नई अपडेट और PM Poshan Yojana 2026 का भविष्य
PM Poshan Yojana 2026 के तहत भविष्य में कुछ महत्वपूर्ण सुधार और नई पहलें की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य योजना को और अधिक प्रभावी बनाना है:
- स्थानीय खाद्य पदार्थों का उपयोग: योजना में स्थानीय रूप से उगाए गए और मौसमी खाद्य पदार्थों को शामिल करने पर जोर दिया जा रहा है। इससे न केवल बच्चों को ताजा और पौष्टिक भोजन मिलेगा, बल्कि स्थानीय कृषि और किसानों को भी प्रोत्साहन मिलेगा।
- पोषण वाटिका (Nutrition Garden) की अवधारणा: स्कूलों में पोषण वाटिकाएं स्थापित करने को बढ़ावा दिया जा रहा है, जहां बच्चे स्वयं सब्जियां और फल उगाना सीखेंगे। यह उन्हें पोषण और कृषि के महत्व के बारे में शिक्षित करेगा और भोजन में ताजी सब्जियों की उपलब्धता सुनिश्चित करेगा।
- सामुदायिक भागीदारी बढ़ाना: योजना के प्रभावी कार्यान्वयन और निगरानी में समुदाय की भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसमें माता-पिता, ग्राम पंचायत सदस्य और स्थानीय स्वयंसेवक शामिल होंगे, जो भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता सुनिश्चित करने में मदद करेंगे।
- पूरक पोषण और माइक्रोन्यूट्रिएंट फोर्टिफिकेशन: कुछ क्षेत्रों में, भोजन को आवश्यक सूक्ष्म पोषक तत्वों से समृद्ध करने (फोर्टिफिकेशन) और पूरक पोषण प्रदान करने पर भी विचार किया जा रहा है, ताकि कुपोषण से बेहतर तरीके से निपटा जा सके।
- टीचिंग लर्निंग मटेरियल (TLM) के साथ बाल वाटिका में पोषण: बाल वाटिका के बच्चों के लिए पोषण को शिक्षण-अधिगम सामग्री के साथ एकीकृत करने की योजना है, ताकि वे खेल-खेल में पोषण के महत्व को समझ सकें।
ये अपडेट PM Poshan Yojana 2026 को अधिक स्थायी, प्रभावी और बच्चों की पोषण संबंधी आवश्यकताओं के प्रति अधिक संवेदनशील बनाएंगे।
12. महत्वपूर्ण नियम और गुणवत्ता नियंत्रण
PM Poshan Yojana 2026 की सफलता सुनिश्चित करने के लिए कुछ महत्वपूर्ण नियम और गुणवत्ता नियंत्रण उपाय स्थापित किए गए हैं:
- केवल स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों को लाभ: यह योजना केवल उन बच्चों के लिए है जो सरकारी या सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों में नामांकित हैं और नियमित रूप से स्कूल आते हैं।
- छुट्टी के दिनों में भोजन नहीं: आमतौर पर, स्कूल की छुट्टियों या अवकाश के दिनों में भोजन प्रदान नहीं किया जाता है।
- गुणवत्ता की निगरानी: भोजन की गुणवत्ता, स्वच्छता और पोषण मानकों को बनाए रखने के लिए सख्त दिशानिर्देश हैं। खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) के मानकों का पालन किया जाता है।
- स्कूल स्तर पर निगरानी: स्कूल प्रबंधन समितियां (SMCs), माता-पिता-शिक्षक संघ (PTAs) और स्थानीय सरकारी निकाय (जैसे ग्राम पंचायतें) भोजन की गुणवत्ता और वितरण की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
- शिकायत निवारण तंत्र: योजना के कार्यान्वयन से संबंधित किसी भी शिकायत या समस्या के लिए एक स्थापित शिकायत निवारण तंत्र मौजूद है।
- खाद्यान्न का भंडारण और परिवहन: खाद्यान्न के सुरक्षित भंडारण और परिवहन के लिए भी दिशानिर्देश हैं ताकि बर्बादी को कम किया जा सके और गुणवत्ता बनी रहे।
ये नियम और निगरानी तंत्र सुनिश्चित करते हैं कि योजना अपने उद्देश्यों को प्रभावी ढंग से प्राप्त करे और बच्चों को सुरक्षित और पौष्टिक भोजन मिले।
13. चुनौतियाँ और आगे का मार्ग
हालांकि PM Poshan Yojana 2026 एक अत्यधिक सफल योजना है, फिर भी इसके कार्यान्वयन में कुछ चुनौतियाँ बनी हुई हैं:
- भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता: दूरदराज के क्षेत्रों में भोजन की गुणवत्ता और स्वच्छता मानकों को लगातार बनाए रखना एक चुनौती हो सकती है।
- बुनियादी ढाँचा: कई स्कूलों में पर्याप्त रसोईघर, भंडारण सुविधाएँ और पीने के पानी की व्यवस्था का अभाव होता है।
- खाद्य सामग्री की आपूर्ति श्रंखला: खाद्यान्न और अन्य सामग्री की समय पर और कुशल आपूर्ति सुनिश्चित करना, विशेषकर दूरस्थ क्षेत्रों में, एक जटिल कार्य है।
- निगरानी और मूल्यांकन: योजना के प्रभावी ढंग से काम करने के लिए एक मजबूत और पारदर्शी निगरानी और मूल्यांकन प्रणाली आवश्यक है।
इन चुनौतियों का सामना करने के लिए, सरकार लगातार नई नीतियों और प्रौद्योगिकियों को अपना रही है। स्थानीय भागीदारी बढ़ाना, प्रौद्योगिकी का उपयोग करके आपूर्ति श्रंखला को मजबूत करना और नियमित ऑडिट करना भविष्य के लिए महत्वपूर्ण कदम हैं।
निष्कर्ष
PM Poshan Yojana 2026 भारत सरकार की एक अत्यंत महत्वपूर्ण और दूरगामी योजना है। यह बच्चों को केवल भोजन प्रदान नहीं करती, बल्कि उन्हें एक स्वस्थ, शिक्षित और उज्जवल भविष्य की नींव प्रदान करती है। कुपोषण से लड़ते हुए, यह योजना बच्चों को स्कूल में बनाए रखने और उनके सीखने के परिणामों में सुधार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
यह योजना सामाजिक समानता को बढ़ावा देती है और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को राहत प्रदान करती है। PM Poshan Yojana 2026 का लक्ष्य भारत के भविष्य को सशक्त बनाना है, यह सुनिश्चित करते हुए कि देश का कोई भी बच्चा भूख या कुपोषण के कारण अपनी पूरी क्षमता तक पहुंचने से वंचित न रहे। यह वास्तव में “भूख और शिक्षा” दोनों समस्याओं का समाधान है, जो एक मजबूत और प्रगतिशील भारत के निर्माण में एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में खड़ा है।
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